छत पर उसे ये कहा उस रात
बात ज़माने की नहीं अरमान मचल जाते है..... "
तुझे सीने से लगाकर तुझे आरज़ू बना लूँ
तेरी साँसों से मिलकर तुझे खुशबू बनाऊ
फासले न रहे हम दोनों के दरमियाँ
मैं,मैं न रहूँ बस "हम " बनजायें।
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